एमपी दस्तक के लिए अजमत की रिपोर्ट
उमरिया। मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में बुजुर्गों का सम्मान किया और कहा कि राज्य में उन्हें कोई तकलीफ नहीं होगी, लेकिन जमीनी हालात इससे जुदा है। शहर से दूर दराज़ के गांवों में बुजुर्ग अपने अधिकारों से वंचित हैं। जिले में निकाली जा रही न्याय एवं बाल अधिकार यात्रा में ऐसी ही कहानियां देखने को मिल रही हैं।
जिले में आधार कार्ड नहीं बनने से बुजुर्ग पेंशन से वंचित हो रहे हैैं। समस्या यह आ ही है कि बुज़ुर्गों की अंगुलियां आधार मशीन में पकड़ में नहीं आ पातीं। इससे उनके आधार कार्ड ही नहीं बनते हैं। इस नियम को लागू होने के बाद बुजुर्ग बड़ी संख्या में खाद्यान्न से वंचित हो रहे हैं।
ग्राम मगरघरा की बेटीबाई 75 साल की हैं। वह चल फिर भी नहीं पाती। अब तो अपने से बाहर भी नहीं जा सकती है। ऐसे स्थिति में जहाँ सरकार पोषण की सुरक्षा पर करोड़ों रुपय ख़र्च कर रही है वहीं आधार कार्ड न बनने से इसका पेंशन व खाद्यन पिछले 6 माह से बंद कर दिया गया है।
बेटी बाई के बेटे सहदेव सिंह बताते है कि आधार कार्ड बनवाने के लिए 3-4 बार उमरिया ले कर जाना हुआ है इस दौरान 200 रुपए भी ख़र्च हुए है लेकिन हाथ का अँगूठा व आँख में मशीन के न आने से आधार कार्ड नहीं बन सका।
सरकार की योजना में हम जैसे ग़रीबो के लिए कुछ भी नहीं है। आपने यह भी कहा कि शिवराज सरकार हो या मोदी सरकार सब को हमारे गाँव आकर देखना होगा।
सरकार को पेंशन और राशन के लिए ऐसे बुजुर्गों के लिए कोई विकल्प सोचना चाहिए।
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